सर्दियों में छोटे बच्चों को खास देखभाल की जरूरत होती है। अगर बच्चे की पहली सर्दी है, तो आपको सतर्क रहना चाहिए। ठंड के बढ़ते तापमान ने अक्सर छोटे बच्चों को जकड़न की समस्या हो जाती है। अगर छोटे बच्चों में सीने में जकड़न हो, तो माता-पिता के लिए चिंता बन जाती है। जकड़न होने पर बच्चा सही से सांस नहीं ले पाता है, बेचैन नजर आता है और बार-बार रोता है। जिससे बच्चा परेशान रहता है और रोता है, तो इस स्थिति में माता-पिता को दादी-नानी के नुस्खे आजमाने चाहिए।
बता दें कि दादी-नानी के पुराने नुस्खे पीढ़ियों से अपनाए जाते हैं। बच्चों की सर्दी-जकड़न में अगर दादी-नानी के नुस्खे अपनाए जाएं तो इससे उनको आराम मिलता है। अगर आपका बच्चा भी जकड़न के कारण रात-रातभर सो नहीं पाता है और परेशान रहता है। तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इससे राहत दिलाने वाले कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चे को अगर सीने में जकड़न हो गई है, तो इससे राहत पाने के लिए कई घरेलू नुस्खे हैं। अगर बच्चा मां का दूध पीता है, तो मां को ख्याल रखना है कि उसका पेट साफ हो। वह कोई ऐसी चीजें न खाए-पिएं, जिससे गैस, कब्ज और एसिडिटी की समस्या हो। इसके साथ ही मां को ठंडी तासीर वाली चीजों को खाने से बचना चाहिए। मां की इम्यूनिटी मजबूत होनी चाहिए।
तिल के तिल की मालिश
तिल के तेल से बच्चे की मालिश करने से भी काफी आराम मिल सकता है। इसके लिए तिल के तेल को हल्का गर्म करें और बच्चे की पीठ, सीने और हथेली पर मसाज करें। इस तेल की तासीर गर्म होती है और इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। जो श्वसन मार्ग को खोलने, सूजन को कम करने और बलगम को ढीला करने में मदद करते हैं।
पान का पत्ता
जकड़न कम करने में पान का पत्ता भी मदद करता है। पान के पत्ते को तवे पर हल्का सेंक लें। फिर उसके ऊपर तिल का तेल लगाएं। हाथ से छूकर देखें, पत्ता सिर्फ उतना ही गर्म होना चाहिए, जितना बच्चा सह सके। अब इस पत्ते को बच्चे के सीने पर रख दें और उसको ऊपर से कोई गर्म कपड़ा पहना दें। पान के पत्ते में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एक्सपेक्टोरेंट गुण पाए जाते हैं। जो बलगम को पतला करके बाहर निकालते हैं। साथ ही फेफड़ों की नसों को आराम देने में सहायक है।
जायफल और छुआरा
जकड़न से राहत दिलाने में जायफल और छुआरा भी असरदार है। अगर बच्चे के दांत आ गए हैं, तो उसे दूध में भीगा हुआ छुआरा, मुनक्का और जायफल पाउडर को मिक्स करके खिलाएं। फिर अगर बच्चा कुछ महीनों का है, तो सिर्फ जायफल का पाउडर दूध में मिलाकर 1 चम्मच बच्चे को सुबह और शाम को पिलाएं।