आजकल के बच्चों को संभालना काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है। बदलती लाइफस्टाइल, पढ़ाई का दबाव, मोबाइल और स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया का बच्चों के व्यवहार पर साफ असर नजर आता है। ऐसे में बच्चों की परवरिश को लेकर पेरेंट्स परेशान रहते हैं। उनके व्यवहार को लगातार समझने का प्रयास करते हैं।
लेकिन कई बार बच्चों का जिद्दी होना या कभी छोटी-छोटी बातों पर थप्पड़ मारना अजीब हो जाता है। ऐसे में पेरेंट्स को हर समय डर लगा रहता है कि कहीं उनका बच्चा हिंसक तो नहीं हो गया है। लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि कुछ रिसर्च के अनुसार, यह व्यवहार मनोवैज्ञानिक का एक हिस्सा है, जिसके बारे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको विस्तार में बताने जा रहे हैं।
बार-बार मारना बदतमीजी
बार-बार मारना कभी-कभी बदतमीजी हो सकती है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं हो सकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि बच्चे का व्यवहार अक्सर उनके इमोशन, उम्र और माहौल से जुड़ा होता है।
भावना न व्यक्त कर पाना
ऐसा अक्सर बच्चा तब करता है, जब बच्चा अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता है। उनके पास शब्द नहीं होते हैं और वह अपनी क्षमता से अधिक करना चाहते हैं। इसलिए बच्चों को समझना बेहद जरूरी होता है।
ध्यान आकर्षित करना
अक्सर बच्चा ऐसा तब करता है, जब वह किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहता हो। मारने पर बच्चे को ऐसा लगता है कि अगर वह ऐसा करते हैं, तो उनको सब कुछ आसानी से मिल जाएगा।
सीमाओं को न समझना
बता दें कि बच्चे के पास सीमाओं की समझ नहीं होती है और वह मारना सही समझते हैं। साथ ही उनको ऐसा करने में मजा आता है। वह अक्सर अपनी बातों को कहने के लिए हाथों का सहारा लेते हैं।
कब चिंता का संकेत
अगर बार-बार या जानबूझकर आपका बच्चा दूसरों को चोट पहुंचा रहा है, तो बतौर पेरेंट्स आपको ध्यान देने की जरूरत है।
अगर आपके समझाने के बाद भी आपका बच्चा ऐसा कर रहा है, तो आपको थोड़ी सख्ती करने की जरूरत है।
अगर बच्चा मारने के साथ चिल्लाता भी है, या फिर चीजों को तोड़ रहा है या गुस्सा दिखा रहा है। तो बच्चे का यह व्यवहार बिल्कुल भी सही नहीं है।