Monsoon में प्रेग्नेंट वाइफ की सेहत का ऐसे रखें ख्याल, Husbands इन जरूरी Health Tips को न करें नजरअंदाज

By Ek Baat Bata | Jul 25, 2026

मॉनसून के दौरान प्रेग्नेंसी का समय थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है। बारिश का मौसम भले ही सुहावना लगता है, लेकिन इस दौरान फूड पॉइजनिंग, वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं की इम्यूनिटी में बदलाव आते हैं। जिस कारण प्रेग्नेंट महिलाएं मौसमी संक्रमणों की चपेट में जल्दी आ जाती हैं। वहीं उमस भरे मौसम में ज्यादा पसीना आने, बेचैनी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

ऐसे में पति को चाहिए कि वह अपनी प्रेग्नेंट पत्नी का खास ख्याल रखें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसी जरूरी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको पति को बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

न होने दें पानी की कमी

एक्सपर्ट की मानें, तो मॉनसून में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए। पति को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी प्रेग्नेंट पत्नी रोजाना 2 से 2.5 लीटर साफ या फिर उबला हुआ पानी पीना चाहिए। इसके अलावा नींबू पानी, नारियल पानी, घर पर बना छाछ या ताजा जूस पीना चाहिए। 

खानपान का रखें ध्यान

मॉनसून में पति को अपनी प्रेग्नेंट वाइफ के खानपान का ध्यान रखना चाहिए। हमेशा पत्तेदार हरी सब्जियों को पकाने से पहले इनको अच्छे से धोएं और कुछ देर के लिए सिरके या नमक वाले पानी में भिगोकर रखें। पति को हमेशा पत्नी को फलों को अच्छे से धोकर काटें और काटने के बाद फौरन खाने को दें। बारिश में बाहर का खाना, तला-भुना या स्ट्रीट फूड खिलाने से बचना चाहिए।

आरामदायक जूते-चप्पल

गर्भावस्था में शरीर का संतुलन पहले से अलग हो जाता है। वहीं मॉनसून में फिसलन भी ज्यादा होती है। इसलिए पति को प्रेग्नेंट वाइफ को अच्छी पकड़ वाले एंटी-स्किड और आरामदायक जूते-चप्पल पहनाएं। इससे गिरने या फिसलने का खतरा कम होता है।

एक्सरसाइज करवाएं

अगर बारिश के कारण बाहर वॉक करना संभव नहीं हो, तो घर के अंदर प्रेग्नेंट वाइफ को डॉक्टर की सलाह पर हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जरूर करवाएं।

ऐसे भगाएं मच्छर

घर में मच्छरों की रोकथाम के लिए कुछ जरूरी उपाय करना चाहिए। लेकिन प्रेग्नेंसी में पेस्ट कंट्रोल के दौरान इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स महिलाओं को दूर रखना चाहिए। इससे मलेरिया, डेंगू और अन्य मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।