Relationship Tips: बचपन का लाड प्यार शादी के बाद बढ़ा सकता है तनाव, Parenting स्टाइल से बिगड़ते हैं रिश्ते

By Ek Baat Bata | Sep 28, 2026

भारतीय घरों में आमतौर पर लड़कों और लड़कियों की परवरिश अलग तौर-तरीकों से मनाई जाती है। इसी कारण लड़कियों को पापा की परी और लड़कों को राजा बेटा या फिर मम्माज बॉय कहा जाता है। लेकिन कई बार समय के साथ यह शब्द पॉजिटिव की जगह निगेटिव रूप लेते जा रहा है। सोशल मीडिया पर इन पर बनते मीम्स इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बचपन का दुलार कहीं शादीशुदा जिंदगी पर भारी तो नहीं पड़ रहा है।

जिम्मेदारी न समझना

बचपन में पेरेंट्स पर अधिक निर्भर रहने वाले लोग आगे चलकर अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ पाते हैं। वहीं शादी के बाद इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। वहीं लाड-प्यार में जब सब चीजें आसानी से मिल जाती हैं, तो किसी तरह का बोझ नहीं रहता है और व्यक्ति खुद फ्री रहने लगता है। फिर शादी के बाद अचानक से जिम्मेदारी आने पर रिश्ते को संभालने में समस्या होना लाजमी है।

फैसले लेने में हिचकिचाहट

भारतीय घरों में परवरिश का जो सबसे ज्यादा निगेटिव पहलू है, वह बच्चे को फैसला न लेने देना है। फिर चाहे वह करियर हो, पर्सनल लाइफ हो या फिर पैसों से जुड़ा फैसला हो। जिसके कारण शादीशुदा जिंदगी शुरू होने पर भी कोई फैसला लेने का डर चीजों को खराब कर सकता है।

पार्टनर की दूसरे से तुलना करना

अधिकतर लोग अपने पार्टनर की दूसरों से तुलना करने लगते हैं। जैसे लड़की चाहती है कि उसको जीवनसाथी अपने पिता की तरह मिले, तो वहीं लड़का चाहता है कि उनकी लाइफ पार्टनर में उसकी मां की छवि हो। लेकिन कई बार यह तुलना रिश्ते में कड़वाहट की वजह बन सकती है।

लिमिट्स न बना पाना

अक्सर यह समस्या पुरुषों के साथ होती है, क्योंकि कई परिस्थितियों में लड़के अपने माता-पिता और पत्नी के बीच संतुलन नहीं बिठा पाते हैं। क्योंकि उनका बचपन माता-पिता के साथ बीता है, इसलिए उनको अनदेखा नहीं किया जा सकता है और पत्नी को इस दौरान सबसे ज्यादा साथ की जरूरत होती है, जिससे वह नए परिवार में घुल-मिल पाएं। ऐसे में जब पलड़ा एक ओर भारी होता है, तो इसका असर दूसरी ओर पड़ता है।

इमोशनली मैच्योर नहीं होने पर

जिन बच्चों ने बचपन में डांट नहीं खाई और कभी अपनी चीजों से समझौता करना नहीं सीखा है, वह इमोशनली मैच्योर नहीं हो पाते हैं। इस स्थिति में वह अपने पार्टनर को समझने की जगह सब कुछ अपने पेरेंट्स से शेयर करते हैं, जोकि सिचुएशन को अधिक बिगाड़ देता है।