Parenting Tips: बिना डांटे जिद्दी बच्चे को लाएं सही ट्रैक पर, ये Simple Tricks बदलेंगी Nature

By Ek Baat Bata | May 26, 2026

पहले की तुलना में आज के बच्चे काफी ज्यादा जिद्दी हो गए हैं। जो पेरेंट्स के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता है। अक्सर पेरेंट्स अपनी तरफ से अच्छी परवरिश की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी बच्चे छोटी-छोटी चीजों को लेकर जिद, रोना-धोना या अपनी बात मनवाने का प्रयास करते हैं। लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चों की जिद के पीछे जाने-अंजाने में पेरेंट्स की कुछ गलतियां होती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पेरेंट्स की उन गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

न पर टिके रहें

पेरेंट्स की पहली और सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वह बच्चे के रोने-धोने पर उनकी जिद को पूरा कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से बच्चा समझता है कि जिद करने या रोने से उसकी मांग पूरी हो सकती है। इसलिए माता-पिता को यह याद रखना चाहिए कि अगर किसी बात के लिए उन्होंने एक बार 'न' कह दिया है, तो फिर उसी पर टिके रहें। बच्चे को गुस्सा करने या रोने पर भी अपना फैसला नहीं बदलना चाहिए। ऐसे में बच्चे को एहसास होगा कि जिद करने से भी उसकी मांग पूरी नहीं होगी। वह खुद जिद करना बंद कर देंगे।

बच्चे की 'जिद्दी' न कहें

अक्सर माता-पिता या परिवार के दूसरे मेंबर भी जिद करने वाले बच्चे को 'जिद्दी' कहकर बुलाने लगते हैं। लेकिन ऐसा करना सही नहीं होता है। बच्चे को किसी खास नाम पर बुलाने से वह इसको सच मान लेते हैं और फिर वह वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। इसलिए बच्चे को निगेटिव लेबल देने से बचना चाहिए। जब बच्चा आपकी बात न माने तो भी उसकी तारीफ करें। ऐसा करने से बच्चे के व्यवहार में बदलाव आ सकता है।

जिद के समय न करें बहस

बच्चों की जिद के समय बहस करने से परहेज करना चाहिए। अगर बच्चा किसी बात को लेकर जिद कर रहा है, तो उसको उस दौरान कोई सफाई न दें और न ही बहस करें। क्योंकि इससे स्थिति बिगड़ सकती है। जब आप बच्चे से बहस करते हो, तो उसको लगता है कि उन्हें अटेंशन मिल रही है और जिद का असर हो रहा है। इसलिए उस दौरान शांत रहें और सिर्फ यह बोलें, 'मुझे पता है आप नाराज हो, लेकिन अभी यह नहीं हो सकता है।'