बच्चा अगर एक बार जिद्दी हो जाए, तो जब तक उनकी बात न मान ली जाए तब तक वह पूरा घर सिर पर उठाए रखते हैं। जिद्दी बच्चों के सामने अक्सर पेरेंट्स को घुटने टेकने पड़ते हैं। कभी कुछ खाने की जिद तो कभी बाहर खेलने की या कुछ खरीदने की। बच्चे की जिद पूरी करते-करते पेरेंट्स बच्चों के अंजाने में इतना जिद्दी बना देते हैं कि बच्चा ना सुनना नहीं चाहता है। बच्चों को हर समय अपनी जिद पूरी होते देखना चाहते हैं।
इस जिद को पूरा करने के लिए बच्चा कभी-कभी हाथ-पैर पटकने लगता है। तो कभी वह लड़ने-झगड़ने लगता है जब तक कि उसकी जिद पूरी न हो वह खाना-पीना छोड़ देते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वह जाने-अंजाने अपने बच्चों को जिद्दी न बनने दें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आपका बच्चा जिद करता है, तो बच्चे की जिद करने से रोकना चाहिए।
सारी बातें न मानें
बच्चे की हर बात मानते हैं तो वह हमेशा ही अपनी बात मनवाने की आदत हो जाती है। इसलिए बच्चा जिद्दी न हो, उसको पूरा न करें।
हर बार न मना करें
कई बार पेरेंट्स बच्चों की जरूरत या सही मांग भी नहीं सुनते हैं और उसको पहले ही मना कर देते हैं। ऐसा करने पर बच्चों को गुस्सा आने लगता है और बच्चा जिद्दी बनना शुरू हो जाते हैं। ऐसे में अगर उनकी बात काटी जाए, तो बच्चे पैरेंट्स की बात सुनना छोड़ देते हैं।
बच्चे की भावना को समझें
कई बार माता-पिता सिर्फ अपने दृष्टिकोण से देखते हैं और बच्चे के पॉइंट से समझना नहीं चाहते हैं। इससे बच्चे और पेरेंट्स के बीच सामंजस्य नहीं बैठ पाता है और बच्चा जिद्दी होने लगता है।
सबके लिए बराबर नियम
बच्चे और बड़ों सभी के लिए उम्र के हिसाब से सही नियम सेट किए जाना चाहिए। एक बच्चे का उदाहरण दूसरे को देना या फिर किसी और के लिए बनाए गए नियमों को बच्चे पर थोपना सही नहीं है।
मजाक करें
अगर आपका बच्चा जिद करता है, तो यह स्थिति गंभीर हो जाती है। वहीं माता-पिता और बच्चों के बीच मनमुटाव तक हो जाता है। इस स्थिति को लाइट करने के लिए पेरेंट्स बच्चे से थोड़ा हंसी-मजाक कर सकता है। इससे होगा कि बच्चा इतना गंभीर नहीं रहेगा, लेकिन अपनी जिद पर भी नहीं अड़ा रहेगा।