Parenting Tips: Parents रोज दें बच्चे को फ्री टाइम, बिना टोके बात सुनने से बढ़ेगा Self Confidence

By Ek Baat Bata | Sep 16, 2026

हर पेरेंट्स की यह चाहत होती है कि उनका बच्चा आत्मविश्वास से भरा हो। पेरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा बिना झिझक नए लोगों से खुलकर बात करे, क्लास में बिना डरे हाथ उठाए, मुश्किल कामों को करने से पीछे न हटे, खुद पर भरोसा करना सीखे। लेकिन सिर्फ सोचने या बार-बार कॉन्फिडेंट बनो यह बोलने से आत्मविश्वास नहीं आता है। बल्कि आत्मविश्वास धीरे-धीरे डेली रूटीन लाइफ के अनुभवों से आता है। बच्चे को जब यह महसूस होता है कि उनकी बातों को अहमियत दी गई है। जब वह नई परिस्थिति का सामना करते हैं और मेहनत से किसी चीज को सीखते हैं, तो धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ते लगता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चे को मजबूत और आत्मविश्वासी बनाने के लिए क्या करना चाहिए।

हर दिन थोड़ा फ्री छोड़ें

आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में बच्चों से होने वाली ज्यादातर बातचीत अनुशासन, पढ़ाई या जिम्मेदारियों के बारे में होती है। जैसे जूते सही जगह रखे, लंच किया या नहीं, होमवर्क पूरा हुआ, ऐसे में बच्चे को यह लगने लगता है कि उनके सिर्फ काम करवाने या गलती सुधारने के लिए बातचीत की जाती है। इस आदत को बदलने के लिए रोजाना बच्चे को कुछ समय ऐसा दें, जहां पर उनको कोई सलाह न दी जाए, डांटा न जाए या उनकी परख न की जाए। उस दौरान बच्चे की बातों को ध्यान से सुनें। यह समय स्कूल से लौटते समय, शाम के नाश्ते के समय या फिर सोने से पहले का भी हो सकता है।

इस दौरान जब बच्चा अपने किसी दोस्त, गेम या कोई मजेदार बात बताना चाहे, तो उसको बोलने दें। भले ही वह बात आपके लिए जरूरी न हो, लेकिन वह बच्चे के लिए खास हो सकती है। इसका मकसद बच्चे के जानकारी लेना नहीं बल्कि उनको यह फील कराना कि उनकी भी बातें महत्वपूर्ण हैं।

दूसरों से बात करने का मौके दें

कॉन्फिडेंस अचानक से नहीं आता है, इसकी शुरूआत छोटी-छोटी बातों से होती है। जैसे दुकान पर किसी को धन्यवाद करना, रेस्टोरेंट में अपना ऑर्डर खुद देना, पड़ोसी से बात करना आदि। भले ही आपको यह बातें सामान्य लगें, लेकिन झिझकने और शर्मीले बच्चों के लिए यह सीखने का मौका होता है। वह घर के बाहर लोगों से जब बात करते हैं, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता है। लेकिन हर बातचीत को एग्जाम की तरह न बनाएं। अगर कोई बच्चा किसी के नमस्ते कहने पर पेरेंट्स के पीछे छिप जाता है, तो उसको आगे धकेलने या डांटने की जरूरत नहीं है। इसकी बजाय आप खुद धन्यवाद करें, या अभिवादन करें। इससे बच्चा देखता है और सीखता है।

बच्चे की पसंद की किसी चीज में उसे बेहतर बनने दें

जब बच्चा अपनी मेहनत से किसी स्किल में सुधार करता है, तो इससे बच्चे का सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि वह पढ़ाई में अच्छा हो। वह साइकिल चलाने, तैराकी, संगीत, डांस, ड्रॉइंग, फुटबॉल, क्रिकेट या अन्य किसी एक्टिविटी में इंट्रेस्ट रख सकता है। सबसे जरूरी है कि शुरूआत में बच्चा किसी काम को सीखने की कोशिश करें। वह उस काम को सीखने में मेहनत करे और धीरे-धीरे बेहतर बने। जब बच्चा पहली बार कोई ऐसा काम करता है, तो उसको सिर्फ तारीफ नहीं मिलती है, बल्कि एक अनुभव भी मिलता है। इससे वह खुद भी महसूस करता है कि जो काम वह पहले नहीं कर पाता था, उसने मेहनत की और अब वह कर सकता है। यह एहसास बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है।