Mental Health in Pregnancy: Happy Mom ही दे सकती है Healthy Baby को जन्म, प्रेग्नेंसी में Mental Wellness है बेहद जरूरी

By Ek Baat Bata | Jun 01, 2026

हर महिला के लिए प्रेग्नेंसी उसके जीवन का एक बेहद खास एहसास होता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में न सिर्फ शारीरिक बदलाव होते हैं, बल्कि मानसिक स्थिति में भी काफी असर होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं कई तरह की भावनाओं उत्साह, खुशी, चिंता और कभी-कभी डिप्रेशन से गुजरती है। लेकिन इन सबके बीच जो चीज नजरअंदाज हो जाती है, वह प्रेग्नेंट महिला का मानसिक स्वास्थ्य है। जबकि मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।

मेंटल हेल्थ इतना जरूरी क्यों

मेंटल हेल्थ का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। चिंता, तनाव और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्थितियां प्रेग्नेंसी के दौरान जटिलताओं जैसे की प्रीमैच्योर डिलीवरी, प्रीक्लेम्पसिया और कम जन्म वजन वाले बच्चों को जन्म देने का खतरा बढ़ा सकती हैं।

प्रेग्नेंट महिला के मेंटल हेल्थ का बच्चे के विकास पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। तनाव हार्मोन बच्चे के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है और भविष्य में व्यवहार संबंधी समस्याओं की वजह बन सकते हैं।

हेल्दी मानसिक स्थिति मां को अपने गर्भ में पलने वाले बच्चे के साथ मजबूत संबंध बनाने में मदद करती है। हेल्दी मेंटल हेल्थ मां को बच्चे की देखभाल के लिए तैयार रहने में भी मदद करती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान मेंटल हेल्थ की चुनौतियां

शारीरिक बदलाव, हार्मोनल बदलाव और लाइफस्टाइल में बदलाव की वजह से प्रेग्नेंट महिलाएं अक्सर भावनात्मक उतार-चढ़ाव का अनुभव करती हैं।

डिलीवरी के बारे में चिंता, बच्चे की सेहत और भविष्य के बारे में सोचना आदि प्रेग्नेंट महिलाओं में चिंता की वजह बन सकती है।

कुछ महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान या फिर डिलीवरी के बाद डिप्रेशन महसूस करती हैं।

कई बार महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान अकेलापन महसूस करती हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसे रखें मेंटल हेल्थ का ख्याल

अगर आप किसी भी तरह की मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या का सामना कर रही हैं, तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

परिवार-दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताएं वहीं एक सपोर्ट ग्रुप में शामिल होना फायदेमंद हो सकता है।

डॉक्टर की सलाह पर रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, संतुलित डाइट और पर्याप्त नींद लें।

ध्यान, योग और गहरी सांस लेने जैसी प्रैक्टिस करें, इससे तनाव को कम करने में सहायता मिलती है।

वहीं स्थिति गंभीर लगने पर फौरन अपने डॉक्टर से सलाह लें।