Zindagi Mein Kitni Baar Hota Hai Sachha Pyaar: एक नहीं, दो बार होता है सच्चा प्यार! Love Life पर Survey ने किया चौंकाने वाला खुलासा
By Ek Baat Bata | Feb 20, 2026
प्यार को लोग जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास मानते हैं। हम अक्सर फिल्मों, गानों और कहानियों में प्यार के बारे में सुनने में आता है कि सच्चा प्यार सिर्फ एक बार होता है। प्यार होने पर वही इंसान हमारी पूरी दुनिया बदल देता है। लेकिन असल जिंदगी फिल्मों से थोड़ा अलग होती है। कई बार हम सोचते हैं कि क्या प्यार होने पर दोबारा दिल उतनी ही गहराई से धड़क सकता है। क्या किसी व्यक्ति को एक बार ज्यादा शिद्दत और गहरा प्यार हो सकता है।
आधुनिक जीवनशैली और रिश्ते के बदलते दौर में यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। हर व्यक्ति अपने एक्सपीरियंस से सीखता है, टूटता है, संभलता है और फिर आगे बढ़ता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि विज्ञान इसके बारे में क्या कहता है। क्या सच में जीवन में प्यार कई बार दस्तक दे सकता है।
रिसर्च में आया ये सच
एक शोध संस्थान में किए गए इस अध्ययन में इस दिलचस्प सवाल को समझने का प्रयास किया गया कि आखिर एक व्यक्ति को अपनी पूरी जिंदगी में कितनी बार गहरा और सच्चा प्यार हो सकता है। इस सर्वे में 18 से 99 साल की उम्र के 10 हजार से अधिक अविवाहित लोगों से उनके प्रेम संबंधी एक्सपीरियंस के बारे में विस्तृत से कुछ सवाल किए गए। शोध के नतीजों से यह पता चला कि एक व्यक्ति औसतन अपनी जिंदगी में करीब 2 बार शिद्दत भरा और जुनूनी प्यार महसूस करते हैं।
वहीं आंकड़ों के हिसाब से 14 फीसदी प्रतिभागियों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने ऐसे गहरे प्रेम का अनुभव कभी नहीं किया। वहीं 28 फीसदी लोग सिर्फ एक बार प्यार में पड़े। तो वहीं करीब 30% लोग जिनको दो बार सच्चा प्यार हुआ। 17% लोगों ने 3 बार और 11% लोगों ने 4 या फिर इससे ज्यादा बार गहरे प्रेम का एक्सपीरियंस किया। इन आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि गहरा और सच्चा प्यार हर व्यक्ति के लिए एक अलग एक्सपीरियंस हो सकता है। यह जीवन में एक से ज्यादा बार भी हो सकता है।
उम्र और जेंडर से फर्क
इस रिसर्च में यह भी पाया गया है कि पुरुष और महिलाओं के अनुभव लगभग समान रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही लोगों ने प्यार का अनुभव बढ़ने की संख्या ज्यादा बताई। जिसका मतलब यह है कि किसी भी उम्र में प्यार हो सकता है। प्यार के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है। यह जीवन के अलग-अलग पड़ाव में आपने सामने आ सकता है।